मैं……. कौन हूँ मैं?
एक अजीब सा सवाल है पर इसका जवाब हूँ मैं.
मैं उदासी भी हूँ और ख़ुशी भी हूँ
दर्द हूँ मैं तो ज़िन्दगी भी हूँ
जो कभी बज न सके ऐसा एक साज़ हूँ मैं
हर तरन्नुम में जो शामिल हो वोह आवाज़ हूँ मैं
मैं कभी ख्वाबों की दुनिया में जाके रहती हूँ
तो कभी भीड़ में भी मैं तनहा चलती हूँ
है अगर इश्क मुझे फूलों की सोहबत से
कांटो के हुस्न की भी मैं शैदाई हूँ
अभी चलता है बहारों का सामान साथ मेरे
कभी गूंजती मीलो तलक तन्हाई है
पांव में छले है चलती हूँ फिर भी अंगारों पर
दर्द की परवा किसे कौन है पूछने वाला
दर्द कहता है मुझसे आओ हम दोस्त बने
तनहा राहों पर मिलके एक साथ चलें
मैं वोह कागज़ हूँ जो की कभी जल न सके
मैं वोह हस्ती हूँ जो कभी भी मिट न सके
साथ मेरे बहारों का सामान चलता है
मेरी हर राह को आसमान चुनता है
तनहा रहती हूँ मगर फिर भी नहीं तनहा हूँ
हूँ नहीं और कुछ मैं तो बस एक इंसान हूँ.

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